मधुर मिलन की इस बेला में,

मधुर मिलन की इस बेला में,
नयन लगे हैं द्वारे पर,
अंधकार की राह छोड़, ध्यान लगा उजियारे पर,
आओगे जब तुम साजन,मिल कर 
सेज सजाएंगे,
कुछ तुम कहना अपनी, कुछ हम अपनी सुनायेंगे,
चांद चांदनी लेकर निकला है नभ के गलियारे में,

नेह प्रीत के मोती , पिरोये हमने 
भाव की माला में,
तुम्हे डुबाना है हमको प्रेम भरी मधुशाला में,
बिंदिया माथे पर चमक रही,मार रही लश्कारे में,

आओ तुम्हें छुपा कर रक्खूं, अपने केश की छांव में,
पैरों पर नूपुर झनकाती, इठलाती मैं गांव में,
जल्दी से मिलने आ जाना, तुम घर के पिछवारे में,
सन्तोषी दीक्षित कानपुर

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7 Comments

Swati chourasia

22-Dec-2022 05:50 AM

बहुत ही सुंदर रचना 👌👌

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Gunjan Kamal

21-Dec-2022 09:25 PM

शानदार प्रस्तुति 👌

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Muskan khan

20-Dec-2022 05:38 PM

Osm

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